Monday, September 30, 2013

शेरो-शायरी


(१)
 चंद लम्हे जो गुजारे थे तेरी सोहबत में
तन्हाई में अक्सर उन्हें याद किया करते हैं।

(२)
वालिद का नाम रोशन करने की फिक्र कर,
दाग दामन में गर लगा के जिये भी तो क्या जिये।

(३)
अगर ये हक नहीं हमको, करूँ नजरें किसी से चार,
तराशा जिसने भी मुझे, क्या उसकी गुस्ताखी न थी।

(४)
खुद को आइना समझ के देख अपनी शक्ल,
पानी चढ़े न इतना की डूब जाए ईडियट।  

(५ )
उनकी नजरों का मैं घायल, दर्द मिटाऊ तो कैसे ?
मेरे लिए इस नए शहर में, मैखाना वो पैमाना भी।  

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