उनसे मिलकर लगा मुझे, कुछ आस अभी भी बाकी है ,
कोई नया फ़साना जन्मेगा , आगाज़ अभी भी बाकी है।
बेकाबू होती धड़कन, जब-जब नजरें चार हुयीं,
झुकी हुयी पलकें कहतीं अरमान अभी कुछ बाकी हैं।
अरमानों की बात करें क्या, ये कब पूरे हॊते हैं ,
मृगतृष्णा सी भटकन हैं ये, तृप्ति हमेशा बाकी है।
छोडो इन सब बातों को अब, सिर्फ इन्हे महसूस करो,
करने को अभी काम बहुत हैं, दुनियादारी बाकी है।
कोई नया फ़साना जन्मेगा , आगाज़ अभी भी बाकी है।
बेकाबू होती धड़कन, जब-जब नजरें चार हुयीं,
झुकी हुयी पलकें कहतीं अरमान अभी कुछ बाकी हैं।
अरमानों की बात करें क्या, ये कब पूरे हॊते हैं ,
मृगतृष्णा सी भटकन हैं ये, तृप्ति हमेशा बाकी है।
छोडो इन सब बातों को अब, सिर्फ इन्हे महसूस करो,
करने को अभी काम बहुत हैं, दुनियादारी बाकी है।
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